पर्यावरण के लिए PPE किट के नुकसान स्किन इन्फेक्शन

by current affair, animal,


Posted on 05-06-2021 by Admin


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इस महामारी में PPE किट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को संक्रमण से बचा रही है . पर इस के कुश नुकसान है. डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को  PPE किट सारा सारा दिन पेहनी पड़ती है जिस के कारण डॉक्टरों में स्किन इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ रहा है.

पर्यावरण के लिए ppe किट के नुकसान है 

अगर पीपीई किट, गलव्स, बॉडी सूट, लोअर, हेड कवर, बूट कवर, फेस मास्क और सेनेटाइजर की बोतलों का यदि ठीक से डिस्पोजल नहीं हुआ तो यह पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा सकते  है। N-95 मास्क अलग होता है। आप को पता है के अगर हम ppe किट को इस्तेमाल के बाद कहीं फेंक दिया गया तो उसे गलने में 500 साल लगेंगे.

अगर हम ppe किट को इस्तेमाल के बाद भट्टी में जलाया गया यानी इंसीनरेट किया गया तो उससे 3816 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) निकलेगी। इतनी CO2 को सोखने के लिए किसी एक पेड़ को 182 दिन लगेंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो 182 पेड़ इतनी CO2 को एक दिन में खत्म कर सकेंगे। 

इस टाइम करोड़ों की तादाद में बनाए जा रहे मेडिकल Personal Protective Equipments और N-95 मास्क जो हर रोज use हो रहे है और रोज वातावरण में छिड़के जा रहे लाखों लीटर सैनिटाइजर-डिसइंफेक्टेंट ने भी पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। इससे निपटने में जुटी दुनिया खतरनाक बायो मेडिकल वेस्ट (BMW) का इतना ऊंचा पहाड़ खड़ा कर रही है कि उससे जल्दी पार पाना मुश्किल हो जाएगा।

पीपीई किट, गलव्स, मास्क और सेनेटाइजर का निर्माण प्लास्टिक, लेटेक्स रबर और कैमिकल से किया जाता है। ये सभी इको फ्रेंडली नहीं होते और इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा है।

प्लास्टिक वेस्ट हिमालय के पर्यावरण को गंभीर चुनौती पेश कर रहा है। सैलानियों के साथ प्लास्टिक हिमालय की दुर्गम चोटियों से लेकर अविरल नदियों और घनें जंगलों में भी पहुंच रहा है। जो उत्तराखंड की जैव विविधता के लिए भी खतरा है।

 

 


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